Spiritual Research: गणेश चतुर्थी पर जानिए कौन है असली गणेश? गणेश चतुर्थी का अनसुना सच जो आज तक आपने नहीं सुना होगा | Spiritual Leader Saint Rampal Ji

Spiritual Research: गणेश चतुर्थी पर जानिए कौन है असली गणेश? गणेश चतुर्थी का अनसुना सच जो आज तक आपने नहीं सुना होगा | Spiritual Leader Saint Rampal Ji


गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर खबरों की खबर के इस विशेष कार्यक्रम में आपका बहुत बहुत स्वागत है। मूषक की सवारी करने वाले व मोदक का भोग लगाने वाले श्री गणेश जी के भक्तजन हर वर्ष उनके जन्मदिन आने का बहुत बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। गणेश चतुर्थी वाले दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म दिवस मनाया जाता है। ये वो गजानन भगवान हैं जिन्हें हर कार्य की शुरुआत में देवी देवताओं से पहले पूजा जाता है और आशीर्वाद लिया जाता है।

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 इस वर्ष 10 सितंबर 2021 को  मूषकधारी गणेश जी का जन्म दिवस अर्थात गणेश चतुर्थी है। जिसे मनाने के लिए आप सभी ने भी खूब तैयारियां की होंगी। तो आइए आगे बढ़ते हुए आपको गणेश चतुर्थी पर एक खास पेशकश दिखाते हैं। दर्शकों, भगवान की स्तुति, उसकी कृपा पाने का प्रयास हर व्यक्ति सृष्टि के आरंभ से कर रहा है।


इसी क्रम में अनेकों साधको ने अपने मतानुसार कठिन से कठिन साधनाए की। उद्देश्य सबका एक ही था, परमेश्वर प्राप्ति और भगवान से मिलने वाले लाभ प्राप्त करना। बेशक सबके मतो मे विभिन्नता रही हो परन्तु उद्देश्य सबका एक ही था। प्राचीन समय से ही भारत ऋषि मुनियों का देश रहा है, क्योंकि ये पृथ्वी का एक ऐसा हिस्सा है जहां से पूरी पृथ्वी पर आध्यात्मिकता का उत्थान होता है।


ऋषि मुनि वेदों आधारित साधना करके हर प्रकार के कष्ट का निवारण करने का प्रयास करते थे। परंतु समय के साथ साथ भक्ति मार्ग में विकार आते गए व साधकजन अपने मूल मार्ग से भटककर अर्थात वेद ज्ञान को त्यागकर अज्ञानी धर्मगुरुओं के मार्गदर्शन में शास्त्र विरुध साधना करने लगे। नतीजा यह हुआ कि भक्त समाज भगवान के विधान से विमुख होकर अपनी मनमानी पूजा में व्यस्त हो गया। जिससे न तो कोई अध्यात्मिक लाभ प्राप्त हुआ और न ही भौतिक सुख। और इस निराशाजनक स्तिथि से झुझते हुए बहुत से साधक नास्तिक भी हो गए और बहुत से नास्तिकता की कागार पर पहुंच चुके हैं। आज जिस किसी भी दुखियारी व्यक्ति से भगवान की बात करो तो यही कहता है कि भगवान होता तो हमारी जरूर सुनता, भगवान कहीं नहीं है। 


शास्त्रविरुद्ध साधना करके साधको को वो लाभ प्राप्त नहीं हुए जिसकी उम्मीद से वे साधना करने लगे थे। हर व्यक्ति ये जनता है कि परमात्मा अंधे को आंख देता है, कोढ़ी को काया, बांझ को पुत्र देता है तो निर्धन को माया। परन्तु इतनी भक्ति करने के बावजूद आज हमें वो लाभ प्राप्त नहीं हो रहे जिनके बारे में हमने केवल सुन रखा है, पर कभी महसूस नहीं किया। कारण रहा- मनमानी पूजा, शास्त्रविरुद्ध साधना जिनका वेदों व गीता जी मे कोई प्रमाण नहीं।


एक ऐसी ही परंपरागत पूजा है - गणेश चतुर्थी, जिसमें भक्तजन गणेश जी को आराध्य देव मानकर उनकी आरती स्तुति बहुत ही श्रद्धा व उत्साह से करते है।


गणेश चतुर्ति कैसे शुरू हुई?? 

इसको जानने से पहले हमारे लिए ये जानना जरूरी है कि:

  • क्या वास्तव में गणेश जी पूर्ण परमात्मा है?
  • क्या गणेश जी की पूजा करने से हमारे कर्म बंधन कट सकते है?
  • क्या गणेश जी की पूजा करने से हमें वो सभी लाभ मिलेंगे जिन लाभों के लिए भगवांन को पूजा जाता है?
  • क्या गणेश जी की परंपरागत पूजा करने का समर्थन हमारे पवित्र वेद गीता जी करते है अर्थात क्या गणेश जी की परंपरागत पूजा करना शास्त्र अनुकूल है??


यदि इन प्रश्नों का उत्तर हाँ में है तो हमे गणेश जी की पूजा खूब मन लगाकर करनी चाहिए। परंतु चौंकाने वाली बात यह है कि  इन सभी प्रश्नों का उत्तर नकारात्मक है!! 


हमारे पवित्र शास्त्र इस बात को प्रमाणित करते है


पवित्र गीता जी मे देवी देवताओं की मनमानी पूजा करना मना किया गया है। केवल शास्त्र अनुकूल परमात्मा की पूजा करने का आदेश व निर्देश दिया है। पवित्र वेदों में प्रमाण है ( यहा पवित्र वेदो में जो कबीर साहेब के भगवान होने का प्रमाण है वो clip या फोटो डाली जाए )कि केवल पूर्ण ब्रह्म  कबीर साहेब जी ही पूज्य परमात्मा है वही पाप नासक है व कर्म की रेखा काटकर आत्मा को कर्म बंधन से मुक्त कर सकते है।

कबीर साहेब जी ने भी एक परमात्मा को छोड़कर अन्य देवी देवताओं की शास्त्र विरोध पूजा करने वालो के लिए कहा है-


कबीर, माई मसानी सेढ़ शीतला, भैरव भूत हनुमंत।

साईं उनसे दूर है, जो इनको पूजन्त।।


जी हां केवल गणेश जी की परंपरागत पूजा से पाप कर्म नहीं कट सकते, पूर्ण मोक्ष नहीं हो सकता। गणेश जी की शास्त्र अनुसार साधना विधि है, सत मंत्र है। जो तत्वदर्शी संत से प्राप्त किए जा सकते हैं। जिन मंत्रों की साधना करके हम गणेश जी के लोक को पार कर सकते हैं। जिनकी नित्य साधना हर रोज गणेश चतुर्थी जैसा सुख दे सकती है


ऐसा इसलिए आवश्यक है क्योंकि गणेश जी की परंपरागत पूजा करने का समर्थन न पवित्र वेद करते है और न ही पवित्र गीता जी। यह महज लोक वेद है।जिसका प्रारम्भ गणेश पुराण में लिखी कथा के आधार पर किया गया है।


पुराण ज्ञानानुसार सृष्टि के आरंभ में सभी देवी देवता एकत्रित होकर भगवान शिव जी के पास अपनी दुविधा दूर करवाने के लिए गए। तब भगवान शंकर जी ने अपने दोनों पुत्रों कार्तिकेय व गणेश जी से कहा कि तुम दोनों में से जो इस पृथ्वी की 7 बार परिक्रमा करके सबसे पहले वापिस आएगा वही देवताओं की दुविधा दूर करेगा। तब कार्तिकेय जी अपने वाहन मोर पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने चले गए और गणेश जी ने अपने वाहन मूषक पर बैठकर भगवान शिव व माता पार्वती के चारो और घूम कर 7 बार परिक्रमा पूरी कर ली। जब कार्तिकेय परिक्रमा पूरी करके वापिस आये तब भगवान शिव ने गणेश जी से पृथ्वी की परिक्रमा न करने का कारण पूछा। गणेश जी बोले कि मेरा संसार तो मेरे माता पिता में ही बसा है इसलिए मैंने आपके चारों और परिक्रमा करके पूरे संसार की परिक्रमा कर ली। 


इस बात से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि संसार मे सबसे पहले तेरी पूजा होगी और जो तेरी पूजा करेगा उसकी सब मनोकामना पूरी होगी। और इस तरह तभी से गणेश जी अग्र पूज्य हो गए। सभी देवी देवताओं से पहले उनकी पूजा की जाने लगी।


गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी का जन्म हुआ था जिस कारण से इस दिन गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। अब विचार करने की बात यह है कि जब भगवान शिव जी स्वयं ही पूर्ण परमात्मा नहीं है, अजर अमर नहीं है और स्वयं जन्म-मृत्यु जैसे भयंकर चक्र में फंसे हैं, तो भगवान गणेश जी सर्वोत्तम परमात्मा कैसे हो सकते हैं? वे साधक का मोक्ष कैसे कर सकते हैं? वे अविनाशी कैसे हो सकते हैं?

गणेश जी ही जन्म मृत्यु में आते हैं तो वे साधक का मोक्ष कैसे कर सकते हैं?


यदि ये कहें कि गणेश चतुर्थी के दिन लोग भगवान गणेश जी का जन्मदिन मनाते हैं तो ऐसे दिन की क्या खुशी मनाना जिस दिन के आने से आयु बढ़ रही हो और वो देव, व्यक्ति या महऋषि अपनी मृत्यु के निकट जा रहा हो?हम तत्वज्ञान के आभाव से इस प्रकार की शास्त्र विरूद्ध साधना में लीन हो गए और सही साधना जानने का कभी प्रयास ही नहीं किया। जिसने जो कहा वो मान लिया और आंख बंद करके गलत साधना करने में लगे रहे।

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आश्चर्यजनक बात तो यह है कि तथाकथित धर्मगुरु नाम तो पवित्र ग्रन्थों का लेते रहे परन्तु साधना भक्ति अपनी मनमानी बताते रहे जिस कारण भक्त समाज आध्यात्मिक, भौतिक, शारीरिक, आर्थिक व मानसिक लाभ से पूरी तरह वंचित रह गया। फलस्वरूप कुछ लोग नास्तिक हो गए तो कुछ अन्य परमेश्वर की खोज में निकल पड़े। परन्तु सही राह न मिलने पर वे खोज करते रहे और आज भी कर रहे हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि भगवान एक न एक दिन उनकी जरूर सुनेगा और उन्हें सही मार्ग दिखायेगा।


तो ये समझ लीजिए कि आज भगवान ने आपकी सुन ली और ये सही मार्ग आप सबके सामने रख दिया। वर्तमान में तत्वदर्शी संत रामपाल जी ने मानव जाति पर यह दया की है सभी धर्मो के पवित्र सदग्रन्थों को उन्होंने भगत समाज के रूबरू किया व उन्ही से प्रमाणित कर यह सिद्ध कर दिया कि- गणेश जी की साधना का मंत्र कोई और है।


संत रामपाल जी महाराज भक्त समाज को शास्त्रानुकूल भक्ति साधना बता रहे हैं जिससे उनके अनुयायिओं को सर्व लाभ प्राप्त हो रहे हैं। वे पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की तथा ब्रह्मा, विष्णु, महेश, दुर्गा, गणेश जी सभी भगवानों की  भक्ति साधना वेदोनुसार बताते हैं जिसे करने से परमात्मा प्राप्ति के साथ-साथ भौतिक व शारीरिक लाभ भी प्राप्त होते हैं। इसलिए हमे हमारे पवित्र सदग्रंथो का परीक्षण करना चाहिए, और सदग्रंथो के अनुसार ही भक्ति साधना करनी चाहिए। जो विश्व में आज केवल सन्त रामपाल जी महाराज जी दे रहे है। 


आप सभी दर्शकों से हमारा हाथ जोड़कर निवेदन है कि सत्यभक्ति मार्ग अपनाकर शास्त्रविरुद्ध साधना त्यागें और अपने जीवन को एक नई दिशा देकर अपना कल्याण करवाएं।

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