सतभक्ति से हुए लाभ, पढ़िये कृष्ण कुमार (Krishan kumar) की आप बीती, कैसे आई उनके जीवन में खुशियाँ

संत रामपाल जी महाराज एक ऐसा नाम जो आध्यात्मिक जगत के सच्चे संत हैं और सबसे बड़ी बात समाज सुधार के लिए प्रयत्नशील समाज सुधारक (Social reformer) हैं। संत रामपाल जी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। साथ ही, उनका ज्ञान अद्वितीय है और सबसे बड़ी बात यह है कि वे सभी पवित्र धर्मग्रंथों के अनुसार सही भक्ति विधि बताते हैं।

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सतभक्ति से लाभ प्रोग्राम द्वारा समाज के ऐसे लोगों को सामने लाया गया जो न जाने कितनी समस्याओं से जूझ रहे थे, लेकिन संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई सद्भक्ति से उनकी सभी समस्याएं खत्म हो गईं और उन्हें एक नई ज़िंदगी मिली जो आज लाखों लोगों के लिए उदाहरण हैं। तो आज हम आपको एक ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी से परिचित करवाएंगे जिनको संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर सतभक्ति करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ बल्कि शारीरिक और आर्थिक लाभ भी मिला।

"सतभक्ति से लाभ-Benefits by True Worship" की थीम इस प्रकार है

  • 1. कृष्ण कुमार (Krishan kumar) जी की आपबीती
  • 2. संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा
  • 3. नाम दीक्षा लेने के बाद जिंदगी में आये बदलाव
  • 4. नाम लेने से पहले और बाद का अनुभव
  • 5. मेरा समाज को संदेश
  • 6. सारांश


कृष्ण कुमार (Krishan kumar) जी की आपबीती 

मेरा नाम कृष्ण कुमार (Krishan kumar) है। मैं उत्तम नगर, दिल्ली का रहने वाला हूं। संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेने से पहले घर में जो भी परंपरागत भक्ति होती थी, वहीं करते थे। लेकिन मेरी उसमें कोई आस्था नहीं थी। फिर हम राधास्वामी डेरा ब्यास से जुड़े और वहां पर 7 साल तक सत्संग सुना। उसके बाद मेरा नागपुर में तबादला हो गया था। मैं वहां पर भी राधा स्वामी डेरा ब्यास सत्संग में जाता रहा और वहां से मुझे 1 मार्च 2008 में नामदान मिला। राधास्वामी पंथ से नाम दीक्षा लेने के बाद मुझे हार्ट की दिक्कत रहने लग गई। एक दिन तो मुझे सब कुछ डबल-डबल दिख रहा था। मैं दफ्तर से घर आया और डॉक्टर को दिखाया तो सीटी स्कैन हुआ और डॉक्टर ने बताया कि आपके दिमाग की नसों में क्लोट्स आ गए हैं। डॉक्टर ने मुझे दवाई दी और इंजेक्शन लगाया उससे मुझे कुछ आराम मिला और वहां से मैं घर आ गया। लेकिन मैं हार्ट, बीपी व यूरिक एसिड की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान था। राधास्वामी की भक्ति साधना से मुझे कुछ भी लाभ प्राप्त नहीं हुआ।


संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा

संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश मैंने 12 जून 2010 को लिया। संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेने की प्रेरणा 'भक्ति सौदागर का संदेश' नामक पुस्तक का ज्ञान सुनकर हुई। हमारे दफ्तर में एक सोमदत्त नाम के संत रामपाल जी महाराज के भक्त थे जो मेरे पास अक्सर आते रहते थे। उन्होंने शुरुआत में मेरे से पूंछा कि क्या आप राधास्वामी ब्यास में जाते हो? तो मैंने कहा कि हां। तो वह बोले कि वहां तो कोई भक्ति नहीं है और परमात्मा पृथ्वी पर आये हुए हैं। तो मैंने कहा कि कौन परमात्मा? तो उन्होंने बताया कि संत रामपाल जी महाराज बरवाला हरियाणा में आए हुए हैं। आप वहां पर मेरे साथ चलो मैं आपको वहां से नाम दीक्षा दिलवाता हूं। वहां पर पूर्ण भक्ति हैं और उससे आपकी सभी बीमारियों का समाधान हो जाएगा। लेकिन मैंने उनकी बातों पर ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई।


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फिर सोमदत्त जी मेरे पास प्रतिदिन आने लग गए और भक्ति सौदागर का संदेश नामक पुस्तक पढ़-पढ़ कर सुनाने लगे, तो मुझे भी धीरे-धीरे इस ज्ञान में रुचि होने लगी। फिर एक दिन मैं उनको घर पर लेकर आया और अपनी भक्तमति के साथ संत रामपाल जी महाराज जी के आश्रम बरवाला गए। वहां जाकर मैंने नाम उपदेश लिया। बरवाला आश्रम में जाकर मुझे बहुत अच्छा लगा। वहां पर सब भक्त एक दूसरे से बहुत ही प्यार से मिल रहे थे।

नाम दीक्षा लेने के बाद कि जिंदगी में आये बदलाव

संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाने के बाद मेरी सभी समस्याओं का समाधान हो गया और सबसे बड़ा लाभ तो मुझे यह मिला कि जब मेरा पित्त की थैली का ऑपरेशन होना था। डॉक्टरों ने मेरी सारी जांच करी तो उन्होंने यह ऑपरेशन करने से मना कर दिया। कहा कि इनका हार्ड बहुत ज्यादा कमजोर है यह ऑपरेशन नहीं हो सकता। पित्त की थैली की कंडीशन ऐसी थी कि वह कभी भी फट सकती थी। उसके बाद OT में सभी डॉक्टरों की मीटिंग हुई और सीनियर डॉक्टर आए तो उन्होंने कहा कि चलो ऑपरेट कर लेते हैं। 

मुझे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। मेरे हाथ पर रक्षा सूत्र बंधा हुआ था तो डॉक्टर ने कहा कि इसे काट देते हैं ब्लड सरकुलेशन में दिक्कत आएगी तब मैंने कहा कि इसको मत काटना और चाहे जो करलो। उसके बाद मुझे बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया और वहाँ पर तीन डॉक्टर खड़े थे और उनमें मुझे संत रामपाल जी महाराज दिखाए दिये। फिर धीरे-धीरे मेरी आंखें बंद हो गईं और मैं बेहोश हो गया। डेढ़ घंटे के बाद मैं होश में आया और वहां पर जितने भी ऑपरेशन हुए थे सब 5-6 घंटे से बेहोश पड़े थे। मैं जब बाहर आया तो मेरी भक्तमति ने इतना ही कहा था 'सत साहेब' और मैं उठ कर बैठ गया। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मुझे कुछ हुआ ही नहीं है।

और संत रामपाल जी महाराज जी की दया से मेरा यूरिक एसिड भी कंट्रोल में आ गया। मेरी रीड की हड्डी की भी समस्या थी डॉक्टरों ने मुझे नीचे बैठने से मना कर रखा था। मैं सीधा नहीं बैठ सकता था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज जी की दया से अब इसमें भी मुझे बहुत ज्यादा राहत मिली है। मेरी पथरी की समस्या भी धीरे-धीरे कम हो गई। बीपी भी कंट्रोल में आ गया। 31 जुलाई 2014 को मैं सरकारी नौकरी से भी रिटायर्ड हो गया और परमात्मा की दया से मुझे पेंशन भी 43 हजार मिलती है। मेरे पास किसी भी चीज़ की कोई दिक्कत नहीं रहती। जब से मैंने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ली है, मैं सब टेंशन से मुक्त हो गया और मेरे घर में सुख ही सुख हो गए।


नाम लेने से पहले और बाद का अनुभव

राधास्वामी पंथ में हमने 7 साल तक भक्ति करी, लेकिन उस भक्ति से कोई भी सुख नहीं मिला। मेरी समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती ही गईं, लेकिन जब से संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लिया मेरी सभी समस्याएं खत्म हो गईं और वास्तविक भक्ति साधना क्या होती है यह मुझे संत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर पता लगा।

मेरा समाज को सन्देश

मैं समाज के सभी लोगों से यही विनती करता हूं कि आप एक बार संत रामपाल जी महाराज जी का सत्संग अवश्य सुने। आप टीवी पर उनके सत्संग की सीडी या सत्संग पेनड्राइव लेकर सत्संग सुने व ज्ञान गंगा पुस्तक मंगवा कर पढ़ें। इस अनमोल ज्ञान को समझें और उनसे नाम दीक्षा लेने के बाद आपको सर्व सुख व मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेना बहुत आसान हो गया है। संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग बहुत सारे टीवी चैनलों पर आते हैं, सत्संग के दौरान कुछ नंबर दिए जाते हैं। आप उन नंबर पर संपर्क करके अपने नजदीकी नामदान सेंटर का पता करें और आप वहां जाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

सारांश

"सतभक्ति से लाभ-Benefits by True Worship" प्रोग्राम में बताया गया कि "संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद लोगों को लाभ हो रहे हैं" पूर्णतः सत्य हैं। जिसका आप चाहें तो निरीक्षण भी कर सकते हैं। आज संत रामपाल जी महाराज जी के करोड़ों अनुयाई हैं और ऐसे लाखों उदाहरण हैं जिनको संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद बहुत सारे लाभ मिले हैं। 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई भक्ति से कैंसर, एड्स व अन्य लाइलाज बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। क्योंकि धर्मग्रंथ ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, 5, सूक्त 162 मंत्र 5 और सूक्त 163 मंत्र 1-3 में प्रमाण है कि हर बीमारी का इलाज सतभक्ति से ही संभव है, साथ ही वह परमात्मा अपने साधक की अकाल मृत्यु तक टाल सकता है और उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान करता है तथा उस परमात्मा की सतभक्ति से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पवित्र वेद, पवित्र शास्त्रों के अनुसार है और पवित्र गीता जी अध्याय 4 श्लोक 34 में जिस तत्वदर्शी संत के बारे में जिक्र आया है वह तत्वदर्शी संत कोई ओर नहीं संत रामपाल जी महाराज ही हैं। तो देर ना करते हुए आप भी संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान समझे और उनसे नाम दीक्षा लेकर मोक्ष मार्ग प्राप्त करें और 84 लाख योनियों के जन्म मरण से छुटकारा पाएं।

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