Kabir Saheb Ji Prakat Diwas (कबीर प्रकट दिवस) | Spiritual Leader Saint Rampal Ji

खबरों की खबर कार्यक्रम में एक फिर से आप सभी का स्वागत है। आज की इस spiritual research में हम बात करेंगे कबीर प्रकट दिवस के बारे में और साथ ही हम ये भी जानेंगे कि कैसे मनाया जाता है कबीर प्रकट दिवस। 


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कबीर परमात्मा  ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत 1455 ( सन् 1398) सोमवार ब्रह्म मुहूर्त के समय काशी के लहरतारा तालाब में एक विकसित कमल के फूल पर सतलोक से आकर शिशु रूप में प्रकट हुए। और निसंतान दंपति नीरू नीमा को मिले। इसके प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि अष्टानंद जी थे।


गगन मंडल से उतरे, सतगुरु सत्य कबीर।

जल मांहि पौडन किए, सब पीरन के‌ पीर।।


इस उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष इसी दिन कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है। 

आपके लिये यह जानना भी जरूरी है कि 

कबीर साहिब जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है ना की जयंती क्योंकि क्योंकि कबीर परमात्मा ने किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लिया, वह स्वयं प्रकट हुए थे। इसलिए कबीर साहिब की जयंती नहीं बल्कि प्रकट दिवस मनाया जाता हैं।


इस विषय मे कबीर साहेब स्वयं कहते हैं कि : 


ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।

काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।


आज तक लोग कबीर साहिब जी को एक संत, कवि व समाज सुधारक के रूप में ही देखते आए हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि कबीर साहेब ही इस सृष्टि के रचनहार, कुल के मालिक और सभी आत्माओं के जनक है। वह अपनी पुण्य आत्माओं को तत्वज्ञान संदेश देने के लिए प्रत्येक युग में शिशु रूप में प्रकट होकर आते हैं। इसी उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष जेष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी को कबीर प्रकट दिवस मनाया जाता है।


वर्तमान में यथार्थ कबीर पंथी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में हर वर्ष कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाता हैं। धर्म, जाति, रंग आदि के भेदभाव से परे दुनिया भर से सभी लोगों को इस विशाल भण्डारे में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया जाता हैं।

संत रामपाल जी महाराज जी कहते है -


जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। 

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में सब भाई-भाई।

आर्य जैनी और विश्नोई, एक प्रभु के बच्चे सोई।।


इस भण्डारे मे लाखों श्रद्धालु देशी घी से बना हुआ मोहन भोजन को ग्रहण करते हैं। इस भंडारे की विशेष बात यह हैं कि परमेश्वर को भोग लगे‌ हुए इस अमृत भोजन को जो भी ग्रहण करता है उसके कोटि पाप नष्ट हो जाते हैं।


इस दौरान सैंकडों दहेज़ रहित शादियाँ (रमैणी) भी संपन्न कराई जाती हैं। इसमें किसी प्रकार का कोई दिखावा आडम्बर नहीं होता। बिल्कुल साधारण तरीके से संत गरीबदास जी की अमृतवाणी "रमैनी" जो कि 17 मिनट की होती है वह पढ़ कर विवाह कराया जाता हैं।


अनेकों रक्तदान और देहदान शिविर भी लगाए जाते हैं जिनमें हजारों लोग परमार्थ हेतु रक्तदान व देहदान करते हैं।  वर्ष 2017 व 2018 में हरियाणा के रोहतक जिले में संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें लाखों लोगों ने इस भंडारे में भाग लिया और अपने को धन्य महसूस किया।


और सन् 2019 में हरियाणा के रोहतक जिले व मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य पर विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया जिस दौरान लाखों लोगों ने नशावृति दहेज जैसी सभी बुराईयां छोड़कर सत् भक्ति करने का संकल्प किया।


कबीर साहेब के मार्गदर्शन पर चलते हुए संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे संत हैं जो कि समाज सुधार में अति महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं । संत रामपाल जी महाराज का मुख्य उद्देश्य समाज से पाखंडवाद, भ्रष्टाचार, कुरीतियां और अंधश्रद्धा भक्ति को जड़ से समाप्त करना है तथा समाज में फैले जाति - पाति के भेदभाव और अंधविश्वास को पूर्णतया को खत्म करना तथा सर्व मानव समाज को शास्त्रानुकूल सतभक्ति देकर सुख और मोक्ष देना है। करोड़ों लोग संत रामपाल जी महाराज से दीक्षित होकर सुखी हो चुके है।


संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे सच्चे संत है जो समाज सुधार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताए गए आदर्शों पर चलते हुए उनके अनुयाई बिल्कुल साधारण तरीके से विवाह करते है जिसमे किसी प्रकार से दहेज का लेन-देन नहीं होता। साथ ही संत जी के अनुयायी किसी प्रकार का कोई नशा नहीं करते तथा किसी प्रकार का जातिगत भेदभाव, कुरीति और अंधविश्वास नहीं करते। जो काम सरकार सैकडों कानून लगाने के बाद भी नहीं कर पाई वह काम संत रामपाल जी महाराज ने अपने तत्वज्ञान से कर दिखाया है।


संत रामपाल जी महाराज की वह तत्वदर्शी संत है जिनके सानिध्य में भारत विश्व गुरु बनेगा। इसकी भविष्यवाणी अनेकों भविष्यवक्ताओं ने सैकड़ों वर्ष पूर्व ही कर रखी है। भारत में हजारों धर्मगुरु है उनकी गलत भक्ति और क्रियाओं से लोगो को सुख नही मिल रहा है। जिसकी वहज से आम जनता का धर्मगुरुओं पर विश्वास करना कठिन हो गया हैं।

लेकिन जनता को यह विश्वास भी है कि सभी पवित्र धर्मग्रंथ सच्चे हैं औऱ वर्तमान में केवल संत रामपाल जी महाराज सभी धर्मग्रंथों के आधार पर पूर्ण परमात्मा की सत् भक्ति विधि बता रहे हैं। जिससे साधक को वह सर्व सुख मिलते है जो परमात्मा देता है।


वर्तमान में वह तत्वदर्शी संत, संत रामपाल जी महाराज ही हैं जिसकी पहचान श्रीमद्भागवत गीता और वेद में बताई गयी हैं। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 625वाँ कबीर प्रकट दिवस संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में मनाया जा रहा हैं।


इस वर्ष मनाए जा रहे कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष में अवश्य देखें हमारा विशेष कार्यक्रम सुबह 9:20 बजे से 12:20 बजे तक केवल साधना चैनल पर। अतः आप भी देर ना करते हुए संत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर अपना व अपने परिवार का कल्याण करवाएं। 

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31 Comments

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    1. नीरू-नीमा कबीर साहेब जी के मुंह-बोले माता-पिता थे, जिन्हें कबीर साहेब जी लहरतारा तालाब पर मिले। जहाँ से वो उन्हें अपने घर ले गए तथा पुत्र रूप में पाला। आदरणीय संत गरीबदास जी कहते हैं —
      गरीब, भक्ति मुक्ति ले उतरे, मेटन तीनूं ताप।
      मोमन के डेरा लिया, कहे कबीरा बाप।।

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  2. ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 93 मंत्र 2 में प्रमाण है कि कबीर परमेश्वर माता से जन्म नहीं लेते

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  3. ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
    काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

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  4. "सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनींद्र मेरा।
    द्वापर में करुणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।”

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  5. हम ही अलख अल्लाह हैं कुतुब गोस और पीर।
    गरीबदास खालिक धनी मेरा नाम कबीर।।

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  6. तुम कौन राम का जपते जापम, तांते कटे ना ये तीनों तापम।

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  7. राम नाम कड़वा लागे , मीठा लागे दाम।
    दुविधा में दोनों गए , माया मिली ना राम।।

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  8. कबीर, जिह्वा तो वाहे भली, जो रटे हरि नाम।
    नहीं तो काट के फेंक दियो, मुख में भलो ना चाम।।

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  9. राम राम सब जगत बखाने, आदि राम कोई बिरला जाने ||

    एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घाट-घाट में बैठा एक राम का सकल पासरा, एक राम दुनिया से न्यारा

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  10. कबीरा यह मन मलीन है, धोए ना छूटे रंग ।
    कै छूटै प्रभु "नाम" से, कै छूटै सत्संग ।।

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  11. भई साँच कहूँ तो ये जग ना माने, झूठ कहीं ना जाई हो,
    ये ब्रह्मा विष्णु शिवजी दुखिया, जिन ये राह चलाई हो।।

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  12. उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, फिरता दाने-दाने नूं।
    सर्व कला सतगुरु साहेब की, हरि आए हरियाणे नूं।।

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  13. परमेश्वर कबीर साहेब की वाणी है:-
    जब तक गुरु मिले नहीं सांचा।
    तब तक करौ गुरु दस पांचा‌‌।।

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  14. तुलसी, पिछले पाप से, हरि चर्चा ना भावै।

    जैसे ज्वर के वेग से, भूख विदा हो जावै।।

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  15. भजन कर राम दुहाई रे, भजन कर राम दुहाई रे।
    जन्म अनमोला तुझे मिला नर देही पाई रे।।

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  16. कबीर, लूट सको तो लूटियों, राम नाम की लूट।
    फिर पीछे पछताओगे, प्राण जाहिंगे छूट ।।

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  17. तीर्थ गये फल एक हैं,संत मिले फल चार। सतगुरू मिले अनेक फल, कहे कबीर विचार।।

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  18. मात-पिता मिल जायेंगे, लख चौरासी माहिं।
    सतगुरु सेवा और बंदगी, फिर मिलन की नाहि।।

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  19. 🥉🖋️कबीर,नौ मन सूत उलझिया, ऋषि रहे झख मार।
    सतगुरू ऐसा सुलझा दे,उलझे न दूजी बार।।🖋️🥉

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  20. कोटि जन्म तू राजा कीन्हा, मिटि न मन की आशा।
    भिक्षुक होकर दर-दर हांड्या,मिला न निर्गुन रासा।।

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  21. कबीर,काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय।
    भक्ति कर दिल पाक से,जीवन है दिन दोय।।

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  22. जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।

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  23. सन्त रामपाल जी महाराज जी ने सही कहा है। संत रामपाल जी महाराज जी तत्वदर्शी संत है।

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  24. बहुत अच्छी जानकारी

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