सतभक्ति से लाभ-विनोद कुमार (Vinod Kumar) जी की आपबीती, संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेने से जीवन हुआ सुखी

संत रामपाल जी महाराज एक ऐसा नाम जो आध्यात्मिक जगत के सच्चे संत हैं और सबसे बड़ी बात समाज सुधार के लिए प्रयत्नशील समाज सुधारक (Social reformer) हैं। संत रामपाल जी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। साथ ही, उनका ज्ञान अद्वितीय है और सबसे बड़ी बात यह है कि वे सभी पवित्र धर्मग्रंथों के अनुसार सही भक्ति विधि बताते हैं।

सतभक्ति से लाभ प्रोग्राम द्वारा समाज के ऐसे लोगों को सामने लाया गया जो न जाने कितनी समस्याओं से जूझ रहे थे, लेकिन संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई सद्भक्ति से उनकी सभी समस्याएं खत्म हो गईं और उन्हें एक नई ज़िंदगी मिली जो आज लाखों लोगों के लिए उदाहरण हैं। तो आज हम आपको एक ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी से परिचित करवाएंगे जिनको संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर सतभक्ति करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ बल्कि शारीरिक और आर्थिक लाभ भी मिला।


"सतभक्ति से लाभ-Benefits of True Worship" की थीम इस प्रकार है


  • 1. विनोद कुमार (Vinod Kumar) जी की आपबीती
  • 2. संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा
  • 3. नाम दीक्षा लेने के बाद कि जिंदगी में आये बदलाव
  • 4. नाम लेने से पहले और बाद का अनुभव
  • 5. मेरा समाज को संदेश
  • 6. सारांश


विनोद कुमार (Vinod Kumar) जी की आपबीती

मेरा नाम विनोद कुमार (Vinod Kumar) है। मैं गांव - अलीपुर, जिला - बुलन्दशहर (उत्तरप्रदेश) का रहने वाला हूँ। मैं जिला बिजनोर के सतपुरुष बाबा फुलसनदे वाले से जनवरी 1998 से जुड़ा हुआ था। "एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा" उनका मन्त्र है। वो यही मन्त्र देते हैं और इसी का जाप सभी से करवाते हैं, खुद भी इसी का जाप करते हैं। वहां से मैं छोड़कर आ गया 2002 में क्योंकि मुझे वहाँ अंतर दिखा।

संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा

संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा मैंने 23 अगस्त 2016 में ली। मैं संत रामपाल जी महाराज की शरण में ऐसे आया कि मैं ट्रक चलाता था, रुद्राक्ष की माला और बाकी सारे देवताओं की भक्ति करता था और पीले कपड़े भी पहनता था, लाल बंडी वगैरह ये सब। तो एक दिन मैं अयोध्या के आगे है जिला बस्ती में हरया नामक जगह में होटल के सामने एक टेलर शॉप में टेलर के पास कपड़ा सिलाने के लिए चला गया। तो वो मुझे समझाने लगा, मैं संत रामपाल जी के बारे में जानता भी नहीं था, वैसे 2014 में वो देखा उसमें पूरा मतलब TV में जितना समय मिलता था देखने के लिए उसमें बदनामी हो रही थी बरवाला की।

बदनामी लोग करते थे मैं इसलिए कुछ नहीं बोलता था कि जहाँ मैं पहले रह रहा था वहाँ पर वो गुरु अभी आश्रम में है और अखबारों में लिखा है ये गुरु जेल में है, इसके यहां तहखाना है, लड़की मिली है ऐसा-ऐसा करके है और हम उनके साथ हैं और वही हैं आश्रम में। आश्रम के बाहर लोग कह रहे हैं हमसे ये बात तो हम सारे हंस रहे हैं, गुरु भी हंस रहा है तो ये सब चीज देखते हुए मुझे यकीन नहीं होता था कि भाई ये तो लोग बदनाम करते हैं हालांकि मैं उनको बिल्कुल भी नहीं जानता था। तो उस टेलर की दुकान पर चारों तरफ उनकी फोटो देखी तो वो समझाने लगा कि ऐसे-ऐसे बात है आप ये भक्ति करो, इसमें गलत चक्कर में पड़ रहे हो।

हमारी 6 महीने तक बहुत तगड़ी चर्चा चली, वो शुरू करता था और मैं खत्म करता था तो उसने मोबाइल चलाया सत्संग सुना और एक सत्संग सुनकर के वो बंद करने लगा तो मैंने कहा ये मेरे को दे तो मैंने जब सत्संग सुना तो सारी रात सत्संग सुनता रह गया। मैंने वो चिप अपने मोबाइल में डाल ली, और सुना तो उसमें संत रामपाल जी सारी दुनिया की जड़ उखाड़ दी। मैंने वो पूरी चिप सुन ली और उसके बाद मेरे से नहीं रुका गया। और मैंने कहा कि मुझे नाम दिलाओ। उस चिप में भक्तों के इंटरव्यू भी थे, वो भी मैंने सुने। फिर मुझे पूरा विश्वास हो गया, मैं 4 किलो डोडा और 50 ग्राम अफीम एक महीने में खा लेता था, तो मुझे इसका भी यकीन हो गया कि ये नशा मेरा छूट जाएगा। ये सच्ची भक्ति है, सच्चे मन्त्र हैं, सच्चा भगवान है इसमें कोई शक नहीं है तो मुझे बुलंदशहर का पता मिला तो यहां आकर संत रामपाल जी महाराज से नाम लिया।

नाम दीक्षा लेने के बाद जिंदगी में आए बदलाव

संत रामपाल जी महाराज से नाम लेने के बाद सबसे पहला लाभ तो मुझे यह हुआ कि मुझे सच्चा भगवान, सच्ची भक्ति मिली। जबकि दूसरी जगह वो निराकार भगवान ही बताते थे। संत रामपाल जी से नाम लेने के बाद मेरा नशा तुरन्त छूट गया। मैं चार किलो डोडा जिसको कुकी बोलते हैं, चूर्ण सा होता है वो और 50 ग्राम सीधा अफीम एक महीने में खा लेता था। लगभग 5 किलो मैं खरीदता था 1 किलो बांटने में चला जाता था और 4 किलो मैं खाता था। मेरे बदन की इतनी हालत खराब थी और मैं इतना परेशान था कि मैंने 2 बार सवाई मानसिंह अस्पताल जयपुर में फ्री में ईलाज करते हैं, वह सरकारी अस्पताल है तो किसी ने बताया तो मैं वहाँ गया, वहां कोई पैसा नहीं लगता तो वो बिल्कुल एकदम नशा छुड़वा दिया। वो 8 दिन में नशा छुड़वाते हैं और मैं वहां 15-20 दिन रहा और उसके बाद घर आया।

उन्होंने दवाई दी कि ये खाते रहना तो जब तक वो दवाई खाई तब तक तो मैं ठीक रहा और फिर दवाई खत्म हुई और ट्रक चलाना शुरू किया तो मैं अफीम वापस लगातार खाने लग गया और फिर उसके बाद 1 बार और मैं वहां गया था, 2 बार जाकर मैंने वहाँ नशा छोड़ा था लेकिन फिर वापस लग जाता था। मैंने 23 अगस्त 2013 के बाद बिल्कुल नशा नहीं किया। मैं नशा करते-करते परेशान इसलिए हो गया था, बदन इतना कमजोर हो गया था कि शक्ल पहचानने में ही नहीं आ रही थी, काला बदन, काला खून, सभी बोलते थे क्या हो गया। लेकिन वो नशा मेरा यहां छूट गया। बीड़ी तो मैं लगातार ही पीता था, गांजा भी पी लेता था। संत रामपाल जी महाराज की कृपा से ये सारा नशा छूट गया। 

मैं बीमार बहुत ज्यादा रहता था। इसके कारण में दवाई इतनी रखता था जैसे प्राथमिक उपचार बॉक्स की तरह। दवाई खाता तो मैं था लेकिन कोई साथ जा रहा, कोई बीमार मिल जाता तो मैं तुरन्त देता निकालकर और वो भी ठीक हो जाता था। कभी-कभी ऐसा होता था उसको बुखार हो रहा है, उसको कोई भी बीमारी है और उसकी दवाई नहीं है तो मैं दूसरी टेबलेट दे देता था उसको और वो उसको खाकर ठीक हो जाता था। तो जिस दिन मैंने संत रामपाल जी से नाम लिया वह दिन है उसके बाद मुझे बुखार नही चढ़ा।

नाम लेने से पहले और बाद का अनुभव

संत रामपाल जी महाराज जो भक्ति देते हैं वो शास्त्रों के अनुकूल भक्ति है और भगवान को जो हम गाते चले जाते हैं "अंधे को आंख दे कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र दे निर्धन को माया।” वो ये भगवान हैं जिसके बारे में संत रामपाल जी ग्रंथों से प्रमाण सहित बता रहे हैं ये भगवान हैं जो सबकुछ दे सकता है, इसी का है सकल जहूरा। तो हमें पूरा यकीन हो गया कि यही है और अब बदन भी फिट और नशा भी छूट गया। संत रामपाल जी से नाम लेने के बाद नशा और सारी बीमारियां छूट जाती है।

मेरा समाज को संदेश

आज मेरी उम्र 56 साल है और मैं तंदुरुस्त हूँ जबकि 3 साल पहले लोग मेरी हालत देखकर कहते थे कि ये तो मरने वाला है। जो व्यक्ति नशे से पीड़ित, किसी बात से हैरान-परेशान है, आओ संत रामपाल जी से नामदीक्षा लो और अपना कल्याण कराओ। जो लोग नशा छोड़ना चाहते है उन्हें संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा लेनी पड़ेगी। TV पर संत रामपाल जी महाराज का सत्संग आता है जिसमें एक पीली पट्टी चलती है नीचे जिसमें नम्बर हैं, किसी भी नम्बर पर फ़ोन करके पूछ लो कि हम इस जिले से हैं और कैसे नामदीक्षा लेंगे तो आपको पता चल जायेगा कि आप से कितनी दूरी पर आपके जिले में नाम दीक्षा केंद्र हैं तो आप वहां से नामदीक्षा ले सकते हैं।

सारांश

"सतभक्ति से लाभ-Benefits by True Worship" प्रोग्राम में बताया गया कि "संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद लोगों को लाभ हो रहे हैं" पूर्णतः सत्य हैं। जिसका आप चाहें तो निरीक्षण भी कर सकते हैं। आज संत रामपाल जी महाराज जी के करोड़ोंअ नुयाई हैं और ऐसे लाखों उदाहरण हैं जिनको संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद बहुत सारे लाभ मिले हैं। 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई भक्ति से कैंसर, एड्स व अन्य लाइलाज बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। क्योंकि धर्मग्रंथ ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, 5, सूक्त 162 मंत्र 5 और सूक्त 163 मंत्र 1-3 में प्रमाण है कि हर बीमारी का इलाज सतभक्ति से ही संभव है, साथ ही वह परमात्मा अपने साधक की अकाल मृत्यु तक टाल सकता है और उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान करता है तथा उस परमात्मा की सतभक्ति से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पवित्र वेद, पवित्र शास्त्रों के अनुसार है और पवित्र गीता जी अध्याय 4 श्लोक 34 में जिस तत्वदर्शी संत के बारे में जिक्र आया है वह तत्वदर्शी संत कोई ओर नहीं संत रामपाल जी महाराज ही हैं। तो देर ना करते हुए आप भी संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान समझे और उनसे नाम दीक्षा लेकर मोक्ष मार्ग प्राप्त करें और 84 लाख योनियों के जन्म मरण से छुटकारा पाएं।

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