डॉ. जसपाल सिंह कपूर (DR. Jaspal Singh Kapur) जी की आपबीती, संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेने से जीवन हुआ सुखी

संत रामपाल जी महाराज एक ऐसा नाम जो आध्यात्मिक जगत के सच्चे संत हैं और सबसे बड़ी बात समाज सुधार के लिए प्रयत्नशील समाज सुधारक (Social reformer) हैं। संत रामपाल जी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। साथ ही, उनका ज्ञान अद्वितीय है और सबसे बड़ी बात यह है कि वे सभी पवित्र धर्मग्रंथों के अनुसार सही भक्ति विधि बताते हैं।



सतभक्ति से लाभ प्रोग्राम द्वारा समाज के ऐसे लोगों को सामने लाया गया जो न जाने कितनी समस्याओं से जूझ रहे थे, लेकिन संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई सद्भक्ति से उनकी सभी समस्याएं खत्म हो गईं और उन्हें एक नई ज़िंदगी मिली जो आज लाखों लोगों के लिए उदाहरण हैं। तो आज हम आपको एक ऐसे ही एक व्यक्ति की कहानी से परिचित करवाएंगे जिनको संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर सतभक्ति करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ बल्कि शारीरिक और आर्थिक लाभ भी मिला।

"सतभक्ति से लाभ-Benefits of True Worship" की थीम इस प्रकार है


  • 1. डॉ. जसपाल सिंह कपूर (DR. Jaspal Singh Kapur) जी की आपबीती
  • 2. संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा
  • 3. नाम दीक्षा लेने के बाद कि जिंदगी में आये बदलाव
  • 4. नाम लेने से पहले और बाद का अनुभव
  • 5. मेरा समाज को संदेश
  • 6. सारांश


डॉ. जसपाल सिंह कपूर (DR. Jaspal Singh Kapurजी की आप बीती

मेरा नाम डॉ. जसपाल सिंह कपूर (DR. Jaspal Singh Kapur) है। मैं गांव - जसड़ा, मण्डीगोविंदगढ़ (पंजाब) से आया हूँ। पहले मैंने अमृत पान किया हुआ था। 8-9 साल बहुत कठिन साधनायें भी की मतलब 12-12, 1-1 बजे तक सतनाम वाहेगुरु का जाप भी करता था और जो भी जैसे भी बता देता कि परमात्मा के दर्शनों के लिए हठयोग करना, सुबह उठकर 12-1 बजे तक बैठे रहना, 2-2.5 घण्टे मन्त्र जाप करना, जिससे तुझे गुरु नानक जी का दर्शन होगा, ये करने से ये होगा मतलब जो साधु-संत जैसा बता देता वैसे-वैसे हम साधना करने लग जाते थे और हमें 1% भी इससे लाभ नहीं हुआ। इसके चलते 10 साल तक मेरी एक टांग में जख्म हो गया था। 10 साल तक मैं डॉक्टरों को ही क्या किसी बाबा, झाड़-फूंक वाले को नहीं छोड़ा लेकिन आराम नहीं हुआ मुझे।

संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा

मैंने संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा 26 जनवरी 2016 को ली थी। मैंने उनके जेल में जाने के बाद नामदीक्षा ली और उनसे कभी मिलना नहीं हुआ। मैं डॉक्टर हूँ तो मुझे NDPS के केस में झूठा फंसा दिया गया था तो 10 साल की सजा हो गयी थी। मैं पेरोल पर आया हुआ था तो मैं किसी सम्बन्धी भक्त के घर गया था तो वहां पर "ज्ञान गंगा" मिली तो मैंने उसके 2-4 पन्ने पढ़े तो मैंने उनसे कहा कि क्या ये पुस्तक मैं पढ़ सकता हूँ? ये बाबाजी कौन हैं? तो उन्होंने कहा हमारे मौसाजी बहुत बीमार थे, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था तो ये उनसे ठीक हुए हैं।

तो मेरे मन में इच्छा और हुई कि ये तो पढ़नी चाहिए तो मैं फिर वो पुस्तक अपने साथ ले गया, घर पर रखी रही। फिर मैंने उसको पढ़ा थोड़ा बहुत तो ज्ञान अजीब लगा मुझे पढ़कर और ये हुआ कि ऐसी बातें लिखी हुई थी जो मैंने कभी सुनी नहीं और पढ़ी नहीं थी और सच्चा भी लग रहा था तो फिर मैंने मिलाकर भी देखा, पूरी खोजबीन भी की। मैं शाम को भक्तजनों के जो भी विचार आते थे TV पर वो सुनता था, कई साधु-महाराजों के। तब संत रामपाल जी महाराज का साधना चैनल पर प्रोग्राम आ रहा था वहां लग गया चैनल तो मैंने कहा ये तो वही बाबाजी है जो किताब में थे तो मेरे अंदर जो प्रश्न थे, जो इच्छाएं थी, जो परमात्मा के बारे में हल नहीं हो रही थी कि गुरु नानक जी का गुरु कौन है? कुछ ऐसी बातें, वो सारी बातें हल कर दी, ऐसे मन में संतुष्टि हुई कि यही सच्चा ज्ञान है।

जो ये साधु संत हैं वो अपने अज्ञान से परमात्मा को एक तरफ तो निराकार बताते हैं फिर सच्चखंड और सतलोक की बातें भी करते हैं। संत रामपाल जी बताते हैं कि जैसे सूरज का प्रकाश आ रहा है और फिर हम सूरज को निराकार कहें तो ये कैसे हो सकता है कि सूरज है नहीं और उसका प्रकाश आ सकता है। ऐसे ही सच्चखंड है तो वहां कोई तो रहता है, वहां पर कोई परमात्मा है जो कण-कण में व्यापक है, हर इंसान के अंदर समाए हुए है, हमारे अंदर भी है। गुरुजी कहते हैं कि सिर्फ विश्वास करके देखो मैं तो सबमें समाया हुआ हूँ। तो जब मेरे हृदय में वो परमात्मा का ज्ञान समाने लगा तो मुझे ये नहीं पता था कि मैं कहाँ से नामदान लूं तो मैं वापस छुट्टी खत्म होते ही अंदर चला गया। फिर मैं दिसम्बर 2015 में छुट्टी पर आया हुआ था तो मैंने संत रामपाल जी महाराज जी के सत्संग हर बार जब छुट्टी पर आता था तो सुनता था, जेल में भी हम साधना चैनल पर सत्संग सुनते थे तो वहां से मैंने नम्बर नोट किये थे तो मैंने वहां बात की तो वहां से मुझे दीपक जी कॉर्डिनेटर का पता बताया गया। तो जब उनसे मैंने बात की तो फिर मुझे नामदान मिला।

नाम दीक्षा लेने के बाद जिंदगी में आए बदलाव

जब मुझे सजा हुई थी तब मेरी माताजी भी बीमार हो गईं थीं। कैंसर पीड़ित हो गयी थी वो बहुत ज्यादा और उनकी टांगे भी कट गईं थीं। डॉक्टर को दिखाया तो उनके पास कोई ईलाज नहीं था। तो उसके बाद जब मैं पैरोल पर आया तो 1 महीना मेरी माताजी के साथ रहा। फिर दुबारा छुट्टी पर चला गया तो मेरी माताजी की मृत्यु हो गयी थी। फिर मन इतना हताश हो गया क्योंकि माताजी हमें नाम से जोड़ती थीं, गुरुद्वारे लेकर जाती थीं और दिनभर पाठ-पूजाओं में लगाती थीं, खुद भी पाठ-पूजा करती थीं लेकिन उनसे कोई लाभ उनको नहीं मिला। सिर्फ कैंसर से उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गयी। तो मन में यह हुआ कि कोई है जो इन सांसारिक दुःखों से निजात दिला सकता है। फिर जो संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पढ़ा उससे हमें यही आशा की किरण जागी कि विश्व में एक यही संत हैं जो दुःखों से हमें छुटकारा दिला सकते हैं। केस के कारण मेरा परिवार बिखर चुका था तो एक आशा की किरण ये भी थी कि शायद मुझे इस केस से निजात मिल जाये, ये दुःखों से निजात दिला सकते हैं। मेरी बात आपको हास्यास्पद लगेगी लेकिन मैंने 2016 में संत रामपाल जी महाराज जी से उनकी पुस्तक ज्ञान गंगा पढ़कर नाम लिया था और 2018 में ही मैं उस केस से बाइज्जत बरी हो गया।

आज भारत का एक आम नागरिक हूँ ना कि कोई मुजरिम। संत रामपाल जी महाराज की दया से ही मैं बाइज्जत बरी हो पाया हूँ। हमने गुरुजी से प्रार्थना लगाई थी और गुरुजी ने कहा था कि कबीर परमेश्वर दया करेंगे और जो लोग आज मानने को तैयार नहीं हैं कि एक 10 साल का कैदी बाईज्जत बरी भी हो सकता है। जो परमात्मा की खोज थी, जिसके लिए हम कठिन साधनाएं करते थे, मंदिर में भी जाते थे, हनुमान चालीसा भी पढ़ते थे और बहुत-सी ऐसी भक्ति बता देते थे वो भी करने लग जाते थे। एक तड़प थी अंदर और परमात्मा के बारे में पता चला और जिस दिन नामदान लिया उस दिन हृदय में ठंडक पड़ गई। मेरी धर्मपत्नी ने पिथि का ऑपरेशन करवाया था। उन्हें कोई चीज हजम नहीं होती थी, बहुत ज्यादा दर्द होने लगता था, बहुत ईलाज करवाये लेकिन उससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ। नामदान लेने के तुरंत बाद ही गुरुजी संत रामपाल जी की कृपा से वो तकलीफ खत्म हो गयी। 


नाम लेने से पहले और बाद का अनुभव

मुझे संत रामपाल जी महाराज के विचार बहुत अच्छे लगे। उनके सामाजिक कार्य जैसे - दहेज, नशा। मैं नशा बहुत करने लग गया था, दारू बहुत ज्यादा पी जाता था और भी कई नशे करने लग गया था। संत रामपाल जी का सबसे पहले ये नशा छुड़वाते हैं और जो बाबा और संत बताते थे, खाते-पीते सभी हैं, फिर भक्ति भी करते थे, उससे फायदा तो कुछ होता नहीं था लेकिन इसमें सबसे पहली शर्त यही है कि आप नशा त्यागोगे उसके बाद ही आप भक्ति मार्ग पर लग सकते हो। जब मैंने नामदान लिया तब मुझे पता था कि संत रामपाल जी महाराज जेल में हैं और उन पर तो झूठे केस बने हुए थे। जब 2014 में बरवाला कांड हुआ था तब मैं छुट्टी पर आया हुआ था। फिर मेरी सजा भी हो गयी तो फिर छुट्टी पर आकर मैंने संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लिया था। कुछ कारण बस पहले जब मैं जमानत पर आया हुआ था उस समय मैं संत रामपाल जी से जुड़ नहीं पाया और मुझे फिर केस में 10 साल को सजा सुना दी गयी। 

जब मैंने ज्ञान गंगा पुस्तक पढ़ी थी तभी मुझे विश्वास हो गया था कि ये संत जेल में नहीं हैं ये तो कुछ बड़ा करने के लिए जेल में गए हैं। आप ही सोचिए एक संत जो देश से बुराईयों को खत्म कर रहा है - दहेज प्रथा, नशा खत्म हो गया और लोगों को कितने अच्छे विचार प्रदान कर रहे हैं और नए समाज का सृजन कर रहे हैं। उनकी ये एक विचारधारा है। क्या किसी विचारधारा को जेल में बांधा जा सकता है? वो विचारधारा हम हर भक्त के अंदर घर कर चुकी है। किसी इंसान को कैद किया जा सकता है लेकिन उसकी विचारधारा को कैद नहीं किया जा सकता। हम बीमार होते हैं तो संत रामपाल जी के दिए मंत्रों का जाप करते हैं तो उन मन्त्रों के जाप से ही सकारात्म शक्ति आ जाती है और नकारात्मकता, ये जो बीमारी हैं वो अपने-आप ही दूर हो जाती हैं। ये बात आपको हास्यास्पद लगेगी कि एक नाम लेने से कैंसर जैसी बीमारी भी ठीक हो जाती है। ये बिल्कुल सत्य है। परमात्मा संत रामपाल जी महाराज कहते हैं कि कैंसर क्या कैंसर का बाप भी आ जाये वो भी ठीक हो जाएगा बस आप मर्यादा में रहते हुए भक्ति कीजिए। आप भक्ति करेंगे और थोड़ा समय देंगे तो फिर देखिए एक बीमारी ही क्या आपके सभी दुःख दूर होंगे और सांसारिक लाभ भी मिलेंगे।

सॉलिड चीज जिससे सिद्ध हो कि संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण संत है तो वो परमात्मा का ज्ञान है। और उसी से पता चलता है कि आपको क्या लाभ हो गया और क्या ज्ञान है, जिससे सच और झूठ का पता चलता है। जैसे सरकार बताती है कि असली 500 का नोट कौनसा है और नकली कौनसा है। इसी तरह संत रामपाल जी महाराज ने सारे शास्त्र खोलकर बता दिए। संत रामपाल जी महाराज ने जब मुझे बरी करवाया तो मैं केवल उनको एक महान संत ही जान पाया था और जब बाहर आकर मैंने उनको जाना और ज्ञान ग्रहण किया तो वो मुझे एक महान संत ही नहीं भगवान लगे जो कुछ भी कर सकते हैं। कोई भी बीमारी हो, चाहे कुछ भी हो वो कुछ भी कर सकते हैं इस संसार में। ये मैं सब बता नहीं सकता।

 

आज मैं बिल्कुल नशा नहीं करता। संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान होने के बाद मैं ही क्या कोई भी नशे को हाथ नहीं लगाए। ये ज्ञान ही ऐसा है कि कभी दिल ही नहीं करता नशा करने को। कोई बातें करता है, बीड़ी-सिगरेट-शराब पीता है तो उल्टी होने का जैसा हो जाता है। मतलब इतनी नफरत हो जाती है नशे से। जब मैं जेल में था नशे जेल में ही लगते हैं, सरकार हमारी नशा छुड़ाओ कहती है लेकिन जेल में ही नशा बिक रहा है। जो बाहर नहीं नशा मिलता वो जेलों से ही मिलता है। मैं सरकार से कहना चाहूंगा कि आप कृपया इस पर ध्यान दीजिए और संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पढ़िए तभी आप नशे जैसी कुरीतियों से और जो भी समाज में कुरीतियां फैली हुई हैं दहेज प्रथा जैसी इनसे हम छुटकारा पा सकते हैं।

मेरा समाज को संदेश

मैं भक्त समाज से हाथ जोड़कर प्रार्थना करना चाहता हूँ कि जो भी मेरे बहन-भाई इन बाबाओं से जुड़े हुए हैं जो शास्त्र विरुद्ध भक्ति कर रहे हैं, मनमाना आचरण कर रहे हैं। तो कृपया करके एक बार संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पढ़िए तो सही, एक बार विचार करके देखिए वो कहना क्या चाहते हैं। हम सिर्फ मीडिया की बातें सुनकर उनको एक आम आदमी या ये क्या है? ये जान लेते हैं। जब हम उनका ज्ञान पढ़ेंगे, जैसे मैंने पढ़ा और उस पर विश्वास करेंगे। विश्वास तो अपने आप हो जाएगा जब ये सच्चा ज्ञान है, सच्चे ज्ञान पर तो विश्वास होना ही है। तो आपको अपने आप पता चल जाएगा झूठे बाबाओं के बारे में जो कहानियां सुना-सुनाकर हमें काल के जाल में फंसा रहे थे तो उससे हमें निकलने का रास्ता मिलेगा और सच्ची भक्ति और सच्चे प्रमाण मिलेंगे तो हमारे दुःखों का निर्वाण भी होगा और अनेकों फायदे होंगे जो भक्ति करने से ही पता लग सकता है।

छोटे-मोटे फायदे तो संत रामपाल जी कहते हैं हमें रुंगे में ही मिलेंगे, सांसारिक सुख से अधिक मुख्य है चौरासी से मुक्ति। जो हम पहले ही सुनते आ रहे थे कि चौरासी से मुक्ति तो हमें भक्ति करने से ही मिलेगी। हम भक्ति किये जा रहे थे लेकिन हमें ये नहीं पता कि सच्ची भक्ति कौनसी है? बस साधना किये जा रहे थे, रीपीटेशन करते थे, पाठ कर कर लिया, सुबह कर लिया, शाम कर लिया। जहाँ भी कहते माथा टेक लिया शायद हमें वहां से लाभ मिल जाए पर होता कुछ नहीं था बल्कि हमारी दुःख-तकलीफें और बढ़ती जा रही थी। अब हमें पता चला गुरुजी संत रामपाल जी महाराज का ऐसा ज्ञान है कि जैसे मक्खन। हम दूध को रिड़कते हैं तो मक्खन निकलता है, पानी के रिड़कने से मक्खन नहीं निकलेगा। तो जैसे मक्खन निकलता है इसी तरह ज्ञान से पता चलता कि वाकई यह ज्ञान है।

जब मैं जेल में था तो मेरी ड्यूटी लाइब्रेरी में लगी तो लाइब्रेरी में तो मैंने वहां पर डिप्टी साहब से आज्ञा लेकर संत रामपाल जी की किताबें रखी, ज्ञान गंगा, भक्ति से भगवान तक, गीता तेरा ज्ञान अमृत और भी कई किताबें थी। तो जब कोई आकर कहता कि कोई अच्छी सी पुस्तक देना तो मैं उनसे कहता कि अगर आप परमात्मा के बारे में जानना चाहते हैं और नशे से छुटकारा पाना चाहते हैं तो वो कहते कि ऐसी ही किताब हमें दीजिए तो फिर मैं उनको ज्ञान गंगा किताब देता था या भक्ति से भगवान तक देता था। वो पढ़कर हर कोई इंस्पायर हुआ, हर कोई प्रभावित हुआ कि हमें ओर भी किताबें दीजिए और इस तरह वहां परमात्मा ने मुझे पुस्तकों की सेवा दी। लोगों को बहुत अच्छा लगा वो ज्ञान और उनको कई लाभ भी हुए। कोई किताब लेकर जाता था तो वो कहता था कि मुझे किताब रखने मात्र से ही मुझे लाभ हुए है, मेरा केस हल हो गया जो मुझे आशा नजर नहीं आती थी। मैं जन-जन से यही कहना चाहूंगा कि आप उनकी किताबों को पढ़कर देखिए और मिलान करके देखिए। फिर आपको पता चलेगा कि सच क्या है और झूठ क्या है?

सारांश

"सतभक्ति से लाभ-Benefits by True Worship" प्रोग्राम में बताया गया कि "संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद लोगों को लाभ हो रहे हैं" पूर्णतः सत्य हैं। जिसका आप चाहें तो निरीक्षण भी कर सकते हैं। आज संत रामपाल जी महाराज जी के करोड़ोंअ नुयाई हैं और ऐसे लाखों उदाहरण हैं जिनको संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद बहुत सारे लाभ मिले हैं। 

संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताई गई भक्ति से कैंसर, एड्स व अन्य लाइलाज बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। क्योंकि धर्मग्रंथ ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, 5, सूक्त 162 मंत्र 5 और सूक्त 163 मंत्र 1-3 में प्रमाण है कि हर बीमारी का इलाज सतभक्ति से ही संभव है, साथ ही वह परमात्मा अपने साधक की अकाल मृत्यु तक टाल सकता है और उसे 100 वर्ष की आयु प्रदान करता है तथा उस परमात्मा की सतभक्ति से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान पवित्र वेद, पवित्र शास्त्रों के अनुसार है और पवित्र गीता जी अध्याय 4 श्लोक 34 में जिस तत्वदर्शी संत के बारे में जिक्र आया है वह तत्वदर्शी संत कोई ओर नहींं संत रामपाल जी महाराज ही हैं। तो देर ना करते हुए आप भी संत रामपाल जी महाराज जी का ज्ञान समझे और उनसे नाम दीक्षा लेकर मोक्ष मार्ग प्राप्त करें और 84 लाख योनियों के जन्म मरण से छुटकारा पाएं

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