सतभक्ति से लाभ-Benefits of True Worship की थीम इस प्रकार है:-
कश्मीर सिंह राणा (Kashmir Singh Rana) की आप बीती
संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की प्रेरणा
नाम दीक्षा लेने के बाद जिंदगी में आए बदलाव
संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद पहला बदलाव यह हुआ कि जो मैं तामस प्रवृत्ति का इंसान था अब एक सहनशील और सभ्य व्यक्ति बन गया। इसके बाद जो मुझे लाभ मिला वह यह था कि जो मुझे देवताओं का युद्ध होता नजर आता था, मुझे उससे निजात मिल गई। मैंने संत रामपाल जी महाराज से नाम दान लिया तो गुरुदेव की आज्ञा से मैंने सभी देवताओं को जल प्रवाहित कर दिया। मेरी पत्नी है, उसको भी संत रामपाल जी महाराज ने जीवन दान दिया यह सबसे बड़ा लाभ था। हम खेती करते थे मैंने आपको बताया मैं किसान हूं तो एक बार हमने टमाटर की खेती लगा रखी थी। मैं और मेरी भक्तमती हम दोनों ही हिमाचल में रहते हैं। जब हम खेती कर रहे थे उसी समय मेरी पत्नी को सूखी उल्टी आई और वह खत्म हो गई।
मैं आपको यहां एक बात और बताना चाहता हूं कि मैं पहले साधु था और जब मेरी शादी हुई थी तो मैंने अपनी पत्नी को तीन-चार दिन बाद ही यह बता दिया था कि आप की मौत 33-34 साल की उम्र में हो जाएगी। मैंने भविष्यवाणी की थी, जब वह हकीकत में घटित हुई तो मुझे बहुत बड़ा झटका लगा। वह मर चुकी थी, उसकी सांसें भी नहीं चल रही थी, शरीर बिल्कुल पीला पड़ गया। उस दिन बारिश का मौसम था, हिमाचल है तो सब लोग जानते हैं कि दो-तीन घंटे भी अगर बारिश हो जाए तो पहाड़ी इलाकों में धुंध बढ़ जाती है, ठंड के कारण तापमान बहुत कम हो गया। मैं यह बात किसी को बता भी नहीं सकता था। गांव के जो लोग हैं, मुझे मार देते क्योंकि सबके सामने ही मैंने अपने मंदिर के जो देवी देवता थे, उनको जल प्रवाहित किया था और हिमाचल के रीति रिवाज में देवी देवताओं को कुछ ज्यादा ही मानते हैं।
वह सब याद करके मुझे बहुत रोना आ रहा था। फिर मैंने संत रामपाल जी महाराज अपने गुरुदेव से प्रार्थना लगाई तब संत रामपाल जी महाराज ने कहा कि अब इसको आयु दे रहा हूं, इसको भक्ति के लिए उम्र दे रहा हूं। इस बेटी की इतनी ही आयु थी। इतना कहने के 3 घंटे बाद ही गुरु जी मेरे घर आए संत रामपाल जी महाराज और कहा कि आप माला जाप करें और एक बोतल है अमृत जल की तो मैंने अपनी पत्नी के मुंह में अमृतजल डाल दिया। उसके 3 घंटे बाद उसको होश आ गया और वह बिल्कुल स्वस्थ हो गई।
यह सबसे बड़ा चमत्कार था मेरी जिंदगी का, इस घटना के बाद अगर कोई मुझे कहे कि आप संत रामपाल जी महाराज को छोड़ दो तो मैं मर सकता हूं, झुक नहीं सकता, अपने परमात्मा बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज को कभी नहीं छोड़ सकता। संत रामपाल जी महाराज ने इतने सुख दिए हैं कि गिनाते गिनाते मेरी जिंदगी खत्म हो जाए, लाखों जन्म लेकर भी मैं सतगुरु रामपाल जी महाराज के गुणगान नहीं गा सकता।
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